भारतीय इतिहास में विदेशी यात्री

यात्री मुख्य तथ्य
मेगस्थनीज वे चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में सेल्युकस का राजदूत थे । वे एक पुस्तक 'इंडिका' के लेखक भी थे ।
फाहियान वे एक चीनी बौद्ध भिक्षु थे जो विक्रमादित्य (चंद्रगुप्त द्वितीय) के शासनकाल के दौरान भारत आए थे। वे बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी की यात्रा के लिए जाना जाते है। उनकी यात्रा का वर्णन उनके द्वारा लिखी किताब "बौद्ध राज्यों का अभिलेख..." में पाया जाता है ।
ह्वेन त्सांग वे एक चीनी यात्री थे जो हर्षवर्धन के समय भारत आए थे । उनकी किताब सि-यु-की या 'The Records of the Western World' के नाम से जानी जाती है ।
अल बेरुनी एक फारसी विद्वान, जो गजनी मोहम्मद के अभियानो में उसके साथ थे । वे 'तहकीक-ए-हिंद' नामक पुस्तक के लेखक थे । वे भारत का अध्ययन करने वाले पहले इस्लामी विद्वान थे । उन्हें इंडोलॉजी का जनक माना जाता है ।
मार्को पोलो वे एक प्रसिद्ध यूरोपीय यात्री थे, जिन्होंने भारत सहित कई पूर्वी देशों का दौरा किया । उन्होंने दक्षिणी भारत का दौरा किया जहां काकतीय वंश की रुद्रम्मा देवी का शासन था ।
इब्न बतूता इब्न बतूता एक मोरक्कन यात्री था जो मोहम्मद बिन तुगलक के समय में भारत आए थे । उनकी यात्रा का वर्णन रिहला नामक किताब में पाया जाता है ।
थॉमस रो सर थॉमस रो एक अंग्रेज राजनयिक थे, जिन्होंने 1615 में जहांगीर से सूरत की एक अंग्रेजी फैक्ट्री की सुरक्षा की मांग की थी । उनके द्वारा लिखित Journal of the mission to the Mogul Empire तत्कालीन भारतीय इतिहास पर एक मूल्यवान योगदान है ।
विलियम हॉकिन्स कप्तान विलियम हॉकिन्स ने 1609 में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की पहली समुद्री यात्रा का नेतृत्व किया था । उस समय भारत में जहांगीर का शासन था। उसके पास इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का एक निजी पत्र था, लेकिन वह जहाँगीर से फैक्टरी स्थापित करने की अनुमति लेने में सफल नहीं हुआ ।
निकोलो कोंटी इतालवी व्यापारी जो विजयनगर के देव राय प्रथम के शासनकाल के दौरान भारत आया था (1420) ।
अब्दुल रजाक वह फारसी विद्वान और फारस के शासक का कालीकट के राज्य में राजदूत था । उसने विजयनगर के देव राय द्वितीय के शासनकाल (1442 से 1445 तक) में भारत का दौरा किया था ।
सेंट थॉमस माना जाता है कि वह 52 ई में भारत आने वाले पहले ईसाई संत थे ।
फ्रेंकोइस बर्नियर वह एक फ्रांसीसी चिकित्सक और यात्री था जिसने 1658 और 1671 के दौरान भारत का दौरा किया था। वह लगभग 12 वर्षों तक मुगल सम्राट औरंगजेब का निजी चिकित्सक था । उसने Travels in the Mughal Empire नामक किताब लिखी, जो मुख्य रूप से दारा शिकोह और औरंगजेब के शासनकाल के बारे में है ।