भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण संधियाँ

संधि का नाम वर्ष महत्ता
असुर अली की संधि 1639 इस संधि ने मुग़ल साम्राज्य और अहोम साम्राज्य के बीच सीमा की स्थापना की और अहोम को जीतने के लिए मुग़ल के प्रयासों को समाप्त कर दिया ।
पुरंदर की संधि 1665 यह संधि राजपूत शासक और मुगल साम्राज्य के कमांडर जय सिंह प्रथम और मराठा छत्रपति शिवाजी महाराज के बीच हुई थी । जय सिंह द्वारा पुरंदर किले की घेराबंदी करने के बाद शिवाजी को समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर होना पड़ा ।
अलीनगर की संधि 1757 यह संधि सिराज-उद-दावा और रॉबर्ट क्लाइव के बीच हुई थी । इससे अंग्रेज कलकत्ता को मजबूत कर सके और ब्रिटिश माल को बिना कर के बंगाल से गुजरने की अनुमति मिली ।
इलाहाबाद की संधि 1765 यह संधि रॉबर्ट क्लाइव और मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय के बीच हुई थी । इससे अंग्रेजों को बंगाल, बिहार और उड़ीसा से मुगल सम्राट की ओर से कर एकत्र करने का अधिकार मिला ।
मद्रास की संधि 1769 पहले मैसूर युद्ध को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों तथा मैसूर के हैदर अली के बीच यह संधि हुई थी । संधि के तहत, दोनों पक्ष जीते गए क्षेत्रों को वापस करने और तीसरे पक्ष के आक्रमण के मामले में एक दूसरे का समर्थन करने के लिए सहमत हुए |
पुरंदर की संधि 1776 यह संधि पहले आंग्ल-मराठा युद्ध के पहले चरण को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों और मराठों के बीच हुई थी ।
वाडगाँव की संधि 1779 यह संधि पहले आंग्ल-मराठा युद्ध के दूसरे चरण को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों और मराठों के बीच हुई थी ।
सालबाई की संधि 1782 यह संधि प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध को समाप्त करने के लिए अंग्रेजों और मराठों के बीच हुई थी ।
सेरिंगपटम की संधि 1792 यह संधि अंग्रेजों (लॉर्ड कार्नवालिस), मराठों, हैदराबाद और टीपू सुल्तान के बीच हुई थी । इसने तीसरे आंग्ल-मैसूर युद्ध को समाप्त कर दिया, और मराठों, हैदराबाद के निज़ाम तथा अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान के लगभग आधे इलाकों पर कब्जा कर लिया ।
लाहौर की संधि 1846 यह संधि गवर्नर जनरल हेनरी हार्डिंग और युवा महाराजा दलीप सिंह बहादुर के प्रतिनिधित्व में लाहौर दरबार के सदस्यों के बीच हुई थी । इस संधि से पहला आंग्ल-सिख युद्ध समाप्त हुआ ।
अमृतसर की संधि 1846 इस संधि के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने महाराजा गुलाब सिंह को कश्मीर बेचा । महाराजा गुलाब सिंह के वंश ने 1947 तक शासन किया, जब महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर को भारत को सौंप दिया ।